Life इतना आसान नहीं होता इसलिए
जिंदगी जीने के लिए कभी कभी हमें ऐसे साथी की जरूरत होती है जो हर हालत में हमारा साथ दे समझे।
हम मिलो का सफ़र तय करते है अपनी लाइफ में।
कभी कुछ पूरा हो जाता है तो कभी कुछ अधूरा रह जाता है।
कुछ अनकही अनसुनी बाते रह जाती है
जिनको कभी शब्द नहीं मिल पाए।
उन्हीं एहसासों को फिर हम पन्नों पे उतरना शुरू कर देते है
ओर वो पन्ने हमारे राजदार होते है।
इसलिए हम आपके लिए ले आये है “अधूरे ख्वाइश गज़ल ” का एक एहसास जिसमें हमने जिंदगी के कुछ ऐसे ही पन्ने चुराके लाये है
जो आपके हर दर्द हर एहसास को पनाह देगी।
आपके वे एहसास जो आप कहना चाहते थे पर कह नहीं पाए उन्हें बया करेगी।
इसमें आपको “Dard bhare Gazal” in hindi , दर्द भरे गज़ल हिंदी में
“Gazal in life” , “Adhure Khwaish” , अधूरे ख्वाइश गज़ल हिंदी में पढ़ने को मिलेंगे।
जो आपके इस सफर में आपका सहारा बनेगा साथ देगा।
इससे आप अपने एहसासों को आपके अपने तक बिना बोले ही पहुंचा
पाएंगे।
हमे यकीन है इससे आपको आपके जीवन को आसान बनाने में बहुत मदद मिलेगी।
इसलिए इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें, ओर हमारे इस सफर में हमें सहयोग करे ताकि हम आपके लिए ऐसे ही प्यारे प्यारे ग़ज़ल ओर शायरी लाते रहे।
“Adhure khwahish gazal”
(अधूरे ख्वाइश गज़ल)
Adhure khwahish gazal

जो मिला मौका मुझको कभी,
तो जिंदगी के इन खाली पन्नों में
अपनी पूरी थकान लिखूंगी।
इन बुलंद हौसलों ओर
जिम्मेदारियों के पीछे
एक नन्ही सी जान लिखूंगी।
ये जो हर हालात में खुद को
समझाती हु कि ठीक है सब
इस एक झूठी उम्मीद के पीछे
एक सैलाब एक तूफान लिखूंगी।
लिखूंगी एक दिन वो सारी बातें , राते
ओर वो तकिया जो वाकिफ थी
मेरी सारी सिसकियों से
पर जब भी नींद से जागी हर बार एक
नए हौसले के साथ जागी
इन सब के पीछे
एक चट्टान जैसी इंसान लिखूंगी
कभी जो ख्याल आए लिखने का
अगर लिख पाऊं कभी जो में
तो में बस खुद को लिखूंगी।
अधूरे ख्वाइश गज़ल

हर सुबह चेहरे पे एक नया चेहरा
लगा के उठती हु
बीते दिन की सारी बातें भुला के
उठती हु
घर की बड़ी बेटी हु
जिम्मेदारियों से घिरी हु में
ख्वाब सारे अपने तकिए तले
दबा के उठती हु।।
यू तो हासिल न हुआ उम्र भर कुछ
फिर भी न जाने क्या गवा के उठती हूं
फर्क होता है हकीकत ओर ख्वाब में
इसलिए सपनों में ही
सपने सारे जला के उठती हु।
dard bhari gajal $ shayari

ये जो फ़ासले देख रहा है दुनिया
ये फैसला इतना आसान नहीं था
कौन कह रहा है इन्हें लेते वक्त
मेरा दिल परेशान नहीं था
निगाहे छलक रही थी
पलकों के पीछे
कौन कह रहा है कि
मेरे दर्द का कोई निशान नहीं था
सजे थे सपने इन निगाहों में
न जाने कितने
कौन कह रहा हैं कि मेरे कोई
अरमान नहीं था
देखते ही देखते तबाह हो गई में पूरी
ओर तुम कहते हो
मेरा कोई नुकसान नहीं था।।।
Dil ka dard gazal shayari

ये कहानी अब इस पड़ाव पर हैं,
अब मेरा सब कुछ लगा दाव पर है।
इस कदर बिखरे है कि
ये इश्क भी अब आखरी पड़ाव पर है।
चेहरे का क्या है कर लेंगे इसे भी ठीक
फिलहाल तो ध्यान मेरा
बस लगे घाव पर हैं।
देख रही हु आज कल कुछ
ये दरिया का इरादा मुनासिफ नहीं है
अब तो यकीन बस हमें
अपने ही नाव पर है।।
माँ के लिए ग़ज़ल

मन भारी सा लिए
तेरी दहलीज पे आई हु माँ
इस दुनिया के भाग दौड़ में खुदको
बहुत थका कर लाई हूँ मां
यूँ तो हस कर सब संभल लेती हु मैं
पर अंदर एक तूफान छूपाकर
लाई हु माँ
जर्रा जर्रा बिखर कर में
खुदको समेटने आई हूं माँ
ठुकराया इस जहां ने मुझको
तू अपनाएगा ये उम्मीद लाई हु माँ
दर्द से ग़ज़ल तक सफ़र

में याद आऊ तुझको यू ही बेवजह
ऐसा भी कोई साल होता है क्या
मुझसे दूर जाने का कभी
तुझे भी मलाल होता है क्या
भीगी पलके होंठ सिले हुए ओर तेरी याद
कभी मेरे जैसा तेरा भी हाल होता है क्या
ना होगा कभी तेरा मेरा मिलना
देखकर मेरी तस्वीर
सुबह से शाम होता है क्या
सोचा था भूल जाएंगे एक दिन तुम्हे भी हम
पर हर रोज़ की कोशिश यू नाकाम होता है क्या
बताओ न मुझे खोने का
तुझे कोई मलाल होता है क्या
मेरे जैसा तेरा हाल भी
बेहाल होता है क्या
आँखों मे दर्द भरी ग़ज़ल

यादों की पुरानी किताब जब खुलती है
उदास आंखों में भी तस्वीरें
हस्ती खेलती है।
कुछ कहानियां आखो को
नम कर जाते है
कुछ किस्से लबों पे मुस्कान भर जाते है
बीते हुए सारी शाम याद आती है
वो हंसी जो बीत गई है अब
वो बहुत तड़पती है।
किस्मत की तूफानी ने
कर दिये है धुंधले रास्ते
ओर अब भी सीने में धड़कता है दिल
उन यादे के वास्ते।
यही पूराने दिन ही तो
मेरे तन्हाई की आस होती है
जो गुजर के भी हमेशा
मेरे दिल के पास होती है।
मोहब्बत के इजहार पर ग़ज़ल

अगर मोहब्बत है तो
मोहब्बत का इजहार होना चाहिए
चेहरे से नहीं दिल से बीमार होना चाहिए
जो आंखे दरिया हो तो
खतरे में हो आशिक़
जो मोहब्बत कश्ति हो तो
आशिक पार होना चाहिए।
ऐसे लोग भी पढ़ने लगे है आज कल
जैसे शायरी नहीं इसे तो
अखबार होना चाहिए।
कब तक यूं ही भटकेंगे दर – वदर
टूटा फूटा ही सही मगर
हमारा भी कोई घर वार होना चाहिए।
तुम्हारी यादों को बोल दो
यूं न आया करे वक़्त बे बक्त
आखिर मोहब्बत के हिस्से में भी तो
इतवार होनी चाहिए।
इश्क मे रुसवाई ग़ज़ल

किसी को मालूम तक न हुआ
किधर गई में
तेरे लहजे को देख बस
बिखर गई में
अब क्यों तलाशते हो दर बदर मुझको
सबकी ख्यालातों से बहुत दूर
निकल गई में
चट्टान सी मजबूत खड़ी रही हरदम
एक तुझे देखा तो पिघल गई मैं
वो हर किसी को जीने की उम्मीद देने वाली
अब तेरे ही प्यार में देख मर गई मैं।
बचपन की यादे जवानी के दर्द ग़ज़ल

जिंदगी की इस भागा दौड़ी में
कुछ यार खो गये है
कुछ तो छूट गए हमसे
ओर कुछ खुद ही जुदा हो गए हैं।
उन दिनों की वो शरारते
वो बेतुकी बेमतलब सी बाते
बस अब तो है एक ख्याब जैसा
वो दोस्ती वो यादों की बरसाते
भले ही चंद सिक्कों से भरे थे जेब
पर दिल से सबके सब नवाब थे
हर यार एक दूसरे के आंखों के ख्याब थे।
अब तो चंद रुपयों को तलाश में
शहर शहर भटकते है
फोन है नंबर है
बस कॉल लगाने को तरसते है
यकीन था कि साथ मंजिल तक जाएंगे
किसे था पता कि
ये रास्ते ही अजनबी हो जाएंगे
जैसे फरमाइशी बढ़ी
फुर्सत के पल कम हो गई
वो दिन वो पल न जाने सब
कहा गुम हो गई।
वही चेहरे है सब पर
कुछ रास्ते बदल गए है
वक्त के इस धूप छाँव में
बचपन के रिश्ते ढह गए है।
न कोई शिकायत रही
न कोई अब मलाल रहा
बस जिंदगी के दौड़ में थक गए है
आंखों में बस सवाल रहा
जीत के भी हार गए है
ये कैसी जीत है
हा है सब कुछ पास मगर
न वो यार है न वो गीत है।
अपनों से मिले जख्म पर ग़ज़ल

सभी रिश्तों के बीच मैं
एक अनाथ सी लगती हु
मां बाप को दिए हुए
एक श्राप सी लगती हु
वो खुश तो बहुत है मुझे
खुद का हिस्सा बताकर
मगर अंदर ही अंदर उनको
में एक पाप सी लगती हु।
जो चुप हो जाऊं तो
खलने लगती है खामोशी मेरी सबको
जो बोल जाऊ कुछ तो
बत्तमीज बेहिसाब सी लगती हु
मेरी तमाम कोशिशें
नाकाम सी लगती है सबको
जो हो जाए गलती मुझसे
तो सबको बड़ी खराब सी लगती हु
बोझ बन गई हु सब पर बस
कभी समझी नहीं गई मैं
इसी नासमझी में मैं
सबको बेकार सी लगती हु
टूट कर बिखर कर भी
सबको संभालती रही मैं
न जाने क्यों हर मोड़ पे
नाकाम सी लगती हूं।
कभी तो कोई तो केहदे
की उनके लिए जरूरी हु में भी
एक इसी यकीन में हर रोज़
बेताब सी लगती हु।





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