बसंत में जब चारों ओर फूल बिखरता है
तब ये दिल कुछ अलग ही निखरता है
मुझ सा महक फिर
किसी फूल में नहीं होती
जब वो पवन मुझे छू कर गुजरता है।
तेरे बिना इश्क़ हो भी तो कैसे
आखिर बिना खुदा के
इबादत थोड़ी होती है।
में सोचती हु में नहीं हु काबिल उसके
में एक आम सी लड़की
ओर वो मुझको सहजादा लगता है
उसका प्यार उसकी परवाह
तो अलग बात है
वो नाराज़ भी रहे तो भी
मुझको प्यार लगता है।
अकेली में ही नहीं इश्क के मुज़रिम
बेचैन में रहु,
तो घबराया तुम भी करते थे
जब जब रूबरू हुए ओर
ये निगाहें मिली
शरमाती में तो मुस्कुराया
तुम भी करते थे।
छोड़ जाना , भुला देना
ये तो दस्तूर है जमाने की
रूह में बसे लोग
कहा जुदा हो पाते है।
हमने एक चेहरा देखा था
उनमें आंखों का पहरा देखा था
फिर कोई ओर चेहरा याद न हुआ हमें
उनमें प्यार इतना गहरा देखा था।
इश्क़ की पहली हवा सुहानी लगती है
उसके बाद बेकार ये जवानी लगती हैं
जिसे देख कर पूरी उमर गुजार दूँ मैं
तु मुझे जीने की वो आखिरी निशानी लगती है।
आंखों से मेरे अब
दिल का हाल पढ़ लेना
बिन कहे मेरा हर सवाल
पढ़ लेना
जताने की जरूरत ही कहा रही
अब दरमिया हमारे
में उसका नाम लिखूं और
तुम प्यार पढ़ लेना
कभी बेइन्तहा बरस गई मुझपे
कभी कभी चुप चाप गुम सी रही
ये जून की पहली बारिश भी
हा कुछ कुछ तुम सी रही
घड़ी भर ही सही मगर
दिल को आराम देता है
पवन का एक झोंका
जब भी उसका पैगाम देता है
जो पूछो तुम कभी मुझसे
है क्या क्या पसंद मुझको
ओर फिर बताओ में तुमको
चाय, रात , चांद, बरसात, कमल, कलम
किताब, तेरा साथ, तेरी गली ,तेरा शहर,तेरी हाथों में मेरा हाथ
कविता ओर सबसे ज्यादा “तुम”।
गंगा सा नूर है तुझमे और
बनारस के घाट सा तहज़ीब है
तुम्हारी सादगी को देखा है करीब से मैंने
ये मेरा सबसे बड़ा नसीब है।
जो दिल में छुपी है दिखाऊँ कैसे
कुछ तो हो गया है दिल को
बताऊ कैसे
रोकता है ये जहाँ मुझको
लहरों पे नाम लिखने से भी मुझको
तेरा नाम जो दिल पे लिखा है
मिटाऊ कैसे।
तेरी मुस्कुराहट देखूं तो
खुशी मुझे होती हैं।
ओर अगर रूठ जाये तू तो
ये आंखें रोती हैं।
बेचैन हो जाता है दिल
तुझे ख्वाबों में भी दूर जाता देख
मेरे ख्याल से शायद मोहब्बत ऐसी ही होती है।
इज़हार कर इनकार कर ,
बातों की मगर तू शरुआत कर,
शिकायतें है लाखों ये माना हमनें
एक पल ही सही मगर मुलाकात कर
ओर यू कबतलक रोकोगे दिल को आज़ाद कर दो आज
तेरे ही सामने है हम अब तो ज़ाहिर अपने ख्यालात कर।
न जाने कब से उलझी हुई है
वो मेरे सवाल में
अब तो लम्हे कट रहे है
बस उसी के ख्याल में
कुछ यू बस गया है रूह में वो मेरे
पाऊं में खुद को बस उसी के ही हाल में।
में ये कैसे मान लूं कि
उसे खबर ही नहीं मेरे एहसासों का
हम दोनों की बाते अक्सर मिलते है।
इन निगाहों के नशे में चूर हो गया
वो जो शराब के नशे से ऊब चुका था।
पहली बार देखा था मैने उसे और
वो उसी पहली नजर के जादू में डूब चुका था।
तिरछी निगाहे हल्की मुस्कुराहट
पर कोई साफ साफ इशारा भी नहीं
पहली मुलाकात में जान ले गई
ओर जान से मारा भी नहीं।
दर्द है सुकून है ख्वाब है ओर एक असासा है
एक शख्स इन आंखों में बेतहाशा हैं।
उल्फ़त ये जिंदगी ओर बेचैन रूह को
आराम आना तय हैं।
में जब जब सुकून लिखूं
तो तेरा नाम आना तय है।
तुम आए हिस्से हमारे
ये यकीन कैसे आए।
क्योंकि कभी हमारे हिस्से कुछ भी
इतना हसीन नहीं आए।
अगर हू पसंद में तो बताया करो
अपनी मोहब्बत को जताया करो
ये फोन विडियो कॉल ओर तस्वीरों को छोड़ो तुम
तुम्हारी ही हु मैं तुम सामने से बताया करो।
न कभी बताया न कभी जाहिर किया
दिल ही दिल में तुमको इबादत बना लिया
ये जो लोग ढूंढते है खुदा को मंदिर मजारो में
हमने तो इश्क मे महबूब को ही खुदा
बना लिया।
एक तेरे ही इन्तजार में फ़कीर हो गए
तेरी एक मुस्कुराता पे हम अमीर हो गए
उसने तो बस यू ही मुड़कर देखा था मुझे
ओर हम बिना लड़े तेरे इश्क के असीर हो गए।
हु मुसाफिर तेरे ही राह का
मेरा अब कोई घर नहीं रहा
बिना तेरे जिंदगी बस काट रही हु
मगर इसमें अब कोई सफर नहीं रहा
इन आंखों ने देखे है बस एक ख्याब तुम्हारे
तुम मिल गए हो तो किसी चीज की हसरत न रही
अब बेफिक्र हो गई हूं किसी की फिकर नहीं रहा


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